श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.13.24

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

एतदाख्याहि मे ब्रह्मन् सुनीथात्मजचेष्टितम्।

श्रद्दधानाय भक्ताय त्वं परावरवित्तमः॥ २४

etadākhyāhi me brahman sunīthātmajaceṣṭitam|

śraddadhānāya bhaktāya tvaṃ parāvaravittamaḥ|| 24

अर्थ

ब्रह्मन्! आप भूत-भविष्यकी बातें जाननेवालोंमें सर्वश्रेष्ठ हैं, इसलिये आप मुझे सुनीथाके पुत्र वेनकी सब करतूतें सुनाइये। मैं आपका श्रद्धालु भक्त हूँ॥ २४॥

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