श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.14.16

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

स ते मा विनशेद्वीर प्रजानां क्षेमलक्षणः।

यस्मिन् विनष्टे नृपतिरैश्‍वर्यादवरोहति॥ १६

sa te mā vinaśedvīra prajānāṃ kṣemalakṣaṇaḥ|

yasmin vinaṣṭe nṛpatiraiśvaryādavarohati|| 16

अर्थ

इसलिये वीरवर! प्रजाका कल्याणरूप वह धर्म आपके कारण नष्ट नहीं होना चाहिये। धर्मके नष्ट होनेसे राजा भी ऐश्‍वर्यसे च्युत हो जाता है॥ १६॥

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