श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.14.2

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

वीर मातरमाहूय सुनीथां ब्रह्मवादिनः।

प्रकृत्यसम्मतं वेनमभ्यषिञ्चन् पतिं भुवः॥ २

vīra mātaramāhūya sunīthāṃ brahmavādinaḥ|

prakṛtyasammataṃ venamabhyaṣiñcan patiṃ bhuvaḥ|| 2

अर्थ

तब उन्होंने माता सुनीथाकी सम्मतिसे, मन्त्रियोंके सहमत न होनेपर भी वेनको भूमण्डलके राजपदपर अभिषिक्त कर दिया॥ २॥

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