वेन बड़ा कठोर शासक था। जब चोर-डाकुओंने सुना कि वही राजसिंहासनपर बैठा है, तब सर्पसे डरे हुए चूहोंके समान वे सब तुरंत ही जहाँ-तहाँ छिप गये॥ ३॥
श्रुत्वा नृपासनगतं वेनमत्युग्रशासनम्।
निलिल्युर्दस्यवः सद्यः सर्पत्रस्ता इवाखवः॥ ३
वेन बड़ा कठोर शासक था। जब चोर-डाकुओंने सुना कि वही राजसिंहासनपर बैठा है, तब सर्पसे डरे हुए चूहोंके समान वे सब तुरंत ही जहाँ-तहाँ छिप गये॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.14.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 478) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/14/3/