॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.14.26
विष्णुर्विरिञ्चो गिरिश इन्द्रो वायुर्यमो रविः।
पर्जन्यो धनदः सोमः क्षितिरग्निरपाम्पतिः॥ २६
viṣṇurviriñco giriśa indro vāyuryamo raviḥ|
parjanyo dhanadaḥ somaḥ kṣitiragnirapāmpatiḥ|| 26
अर्थ
विष्णु, ब्रह्मा, महादेव, इन्द्र, वायु, यम, सूर्य, मेघ, कुबेर, चन्द्रमा, पृथ्वी, अग्नि और वरुण तथा इनके अतिरिक्त जो दूसरे वर और शाप देनेमें समर्थ देवता हैं, वे सब-के-सब राजाके शरीरमें रहते हैं; इसलिये राजा सर्वदेवमय है और देवता उसके अंशमात्र हैं॥ २६-२७॥