जब मुनिगण अपने-अपने आश्रमोंको चले गये, तब इधर वेनकी शोकाकुला माता सुनीथा मन्त्रादिके बलसे तथा अन्य युक्तियोंसे अपने पुत्रके शवकी रक्षा करने लगी॥ ३५॥✎ 389
ऋषिभिः स्वाश्रमपदं गते पुत्रकलेवरम्।
सुनीथा पालयामास विद्यायोगेन शोचती॥ ३५
जब मुनिगण अपने-अपने आश्रमोंको चले गये, तब इधर वेनकी शोकाकुला माता सुनीथा मन्त्रादिके बलसे तथा अन्य युक्तियोंसे अपने पुत्रके शवकी रक्षा करने लगी॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.14.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 481) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/14/35/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)