श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.14.35

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

ऋषिभिः स्वाश्रमपदं गते पुत्रकलेवरम्।

सुनीथा पालयामास विद्यायोगेन शोचती॥ ३५

ṛṣibhiḥ svāśramapadaṃ gate putrakalevaram|

sunīthā pālayāmāsa vidyāyogena śocatī|| 35

अर्थ

जब मुनिगण अपने-अपने आश्रमोंको चले गये, तब इधर वेनकी शोकाकुला माता सुनीथा मन्त्रादिके बलसे तथा अन्य युक्तियोंसे अपने पुत्रके शवकी रक्षा करने लगी॥ ३५॥✎ 389

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #389 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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