एक दिन वे मुनिगण सरस्वतीके पवित्र जलमें स्नान कर अग्निहोत्रसे निवृत्त हो नदीके तीरपर बैठे हुए हरिचर्चा कर रहे थे॥ ३६॥
एकदा मुनयस्ते तु सरस्वत्सलिलाप्लुताः।
हुत्वाग्नीन् सत्कथाश्चक्रुरुपविष्टाः सरित्तटे॥ ३६
एक दिन वे मुनिगण सरस्वतीके पवित्र जलमें स्नान कर अग्निहोत्रसे निवृत्त हो नदीके तीरपर बैठे हुए हरिचर्चा कर रहे थे॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.14.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 481) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/14/36/