श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.14.37

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

वीक्ष्योत्थितांस्तदोत्पातानाहुर्लोकभयङ्क६रान्।

अप्यभद्रमनाथाया दस्युभ्यो न भवेद्भुवः॥ ३७

vīkṣyotthitāṃstadotpātānāhurlokabhayaṅkarān|

apyabhadramanāthāyā dasyubhyo na bhavedbhuvaḥ|| 37

अर्थ

उन दिनों लोकोंमें आतंक फैलानेवाले बहुत-से उपद्रव होते देखकर वे आपसमें कहने लगे, ‘आजकल पृथ्वीका कोई रक्षक नहीं है; इसलिये चोर-डाकुओंके कारण उसका कुछ अमंगल तो नहीं होनेवाला है?’॥ ३७॥

टिप्पणियाँ

  1. ६

    प्रा० पा०—भयान्तरान्।

    (मुद्रित पृष्ठ 481)

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