ब्रह्मवादी ऋषि उस जोड़ेको उत्पन्न हुआ देख और उसे भगवान्का अंश जान बहुत प्रसन्न हुए और बोले॥ २॥
तद् दृष्ट्वा मिथुनं जातमृषयो ब्रह्मवादिनः।
ऊचुः परमसन्तुष्टा विदित्वा भगवत्कलाम्॥ २
ब्रह्मवादी ऋषि उस जोड़ेको उत्पन्न हुआ देख और उसे भगवान्का अंश जान बहुत प्रसन्न हुए और बोले॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.15.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 483) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/15/2/