ये सरस्वतीके उद्गमस्थानपर सौ अश्वमेधयज्ञ करेंगे। तब अन्तिम यज्ञानुष्ठानके समय इन्द्र इनके घोड़ेको हरकर ले जायँगे॥ २४॥✎ 1604
एषोऽश्वमेधान् शतमाजहार
सरस्वती प्रादुरभावि यत्र।
अहारषीद्यस्य हयं पुरन्दरः
शतक्रतुश्चरमे वर्तमाने॥ २४
ये सरस्वतीके उद्गमस्थानपर सौ अश्वमेधयज्ञ करेंगे। तब अन्तिम यज्ञानुष्ठानके समय इन्द्र इनके घोड़ेको हरकर ले जायँगे॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.16.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 488) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/16/24/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)