ये बड़े दयालु होंगे। यदि कभी कोई दीन पुरुष इनके मस्तकपर पैर भी रख देगा, तो भी ये पृथ्वीके समान उसके इस अनुचित व्यवहारको सदा सहन करेंगे॥ ७॥
तितिक्षत्यक्रमं वैन्य उपर्याक्रमतामपि।
भूतानां करुणः शश्वदार्तानां क्षितिवृत्तिमान्॥ ७
ये बड़े दयालु होंगे। यदि कभी कोई दीन पुरुष इनके मस्तकपर पैर भी रख देगा, तो भी ये पृथ्वीके समान उसके इस अनुचित व्यवहारको सदा सहन करेंगे॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.16.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 486) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/16/7/