श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.17.18

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

उवाच च महाभागं धर्मज्ञापन्‍नवत्सल।

त्राहि मामपि भूतानां पालनेऽवस्थितो भवान्॥ १८

uvāca ca mahābhāgaṃ dharmajñāpannavatsala|

trāhi māmapi bhūtānāṃ pālane'vasthito bhavān|| 18

अर्थ

और महाभाग पृथुजीसे कहने लगी—‘धर्मके तत्त्वको जाननेवाले शरणागतवत्सल राजन्! आप तो सभी प्राणियोंकी रक्षा करनेमें तत्पर हैं, आप मेरी भी रक्षा कीजिये॥ १८॥✎ 1329

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1329 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): शरणा-गतवत्सल → शरणागतवत्सल

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