श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.17.20

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

प्रहरन्ति न वै स्त्रीषु कृतागःस्वपि जन्तवः।

किमुत त्वद्विधा राजन् करुणा दीनवत्सलाः॥ २०

praharanti na vai strīṣu kṛtāgaḥsvapi jantavaḥ|

kimuta tvadvidhā rājan karuṇā dīnavatsalāḥ|| 20

अर्थ

स्त्रियाँ कोई अपराध करें, तो साधारण जीव भी उनपर हाथ नहीं उठाते; फिर आप जैसे करुणामय और दीनवत्सल तो ऐसा कर ही कैसे सकते हैं?॥ २०॥✎ 1329

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1329 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): शरणा-गतवत्सल → शरणागतवत्सल

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