श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.18.3

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

अस्मिँल्लोकेऽथवामुष्मिन्मुनिभिस्तत्त्वदर्शिभिः।

दृष्टा योगाः प्रयुक्ताश्‍च पुंसां श्रेयःप्रसिद्धये॥ ३

asmim̐lloke'thavāmuṣminmunibhistattvadarśibhiḥ|

dṛṣṭā yogāḥ prayuktāśca puṃsāṃ śreyaḥprasiddhaye|| 3

अर्थ

तत्त्वदर्शी मुनियोंने इस लोक और परलोकमें मनुष्योंका कल्याण करनेके लिये कृषि, अग्‍निहोत्र आदि बहुत-से उपाय निकाले और काममें लिये हैं॥ ३॥

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