अब अधिक समय हो जानेसे अवश्य ही वे धान्य मेरे उदरमें जीर्ण हो गये हैं; आप उन्हें पूर्वाचार्योंके बतलाये हुए उपायसे निकाल लीजिये॥ ८॥
नूनं ता वीरुधः क्षीणा मयि कालेन भूयसा।
तत्र योगेन दृष्टेन भवानादातुमर्हति॥ ८
अब अधिक समय हो जानेसे अवश्य ही वे धान्य मेरे उदरमें जीर्ण हो गये हैं; आप उन्हें पूर्वाचार्योंके बतलाये हुए उपायसे निकाल लीजिये॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.18.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 493) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/18/8/