श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.2.32

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

तद्ब्रह्म परमं शुद्धं सतां वर्त्म सनातनम्।

विगर्ह्य यात पाषण्डं दैवं वो यत्र भूतराट्॥ ३२

tadbrahma paramaṃ śuddhaṃ satāṃ vartma sanātanam|

vigarhya yāta pāṣaṇḍaṃ daivaṃ vo yatra bhūtarāṭ|| 32

अर्थ

तुमलोग सत्पुरुषोंके परम पवित्र और सनातन मार्गस्वरूप वेदकी निन्दा करते हो—इसलिये उस पाखण्डमार्गमें जाओ, जिसमें भूतोंके सरदार तुम्हारे इष्टदेव निवास करते हैं’॥ ३२॥

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