यह वेदमार्ग ही लोगोंके लिये कल्याणकारी और सनातन मार्ग है। पूर्वपुरुष इसीपर चलते आये हैं और इसके मूल साक्षात् श्रीविष्णुभगवान् हैं॥ ३१॥
एष एव हि लोकानां शिवः पन्थाः सनातनः।
यं पूर्वे चानुसंतस्थुर्यत्प्रमाणं जनार्दनः॥ ३१
यह वेदमार्ग ही लोगोंके लिये कल्याणकारी और सनातन मार्ग है। पूर्वपुरुष इसीपर चलते आये हैं और इसके मूल साक्षात् श्रीविष्णुभगवान् हैं॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.2.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 415) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/2/31/