श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.2.7

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

सदसस्पतिभिर्दक्षो भगवान् साधु सत्कृतः।

अजं लोकगुरुं नत्वा निषसाद तदाज्ञया॥ ७

sadasaspatibhirdakṣo bhagavān sādhu satkṛtaḥ|

ajaṃ lokaguruṃ natvā niṣasāda tadājñayā|| 7

अर्थ

इस प्रकार समस्त सभासदोंसे भलीभाँति सम्मान प्राप्त करके तेजस्वी दक्ष जगत्पिता ब्रह्माजीको प्रणाम कर उनकी आज्ञासे अपने आसनपर बैठ गये॥ ७॥

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