श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.22.59

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

धर्मराडिव शिक्षायामाश्‍चर्ये हिमवानिव।

कुबेर इव कोशाढ्यो गुप्तार्थो वरुणो यथा॥ ५९

dharmarāḍiva śikṣāyāmāścarye himavāniva|

kubera iva kośāḍhyo guptārtho varuṇo yathā|| 59

अर्थ

महाराज पृथु दुष्टोंके दमन करनेमें यमराजके समान, आश्‍चर्यपूर्ण वस्तुओंके संग्रहमें हिमालयके समान, कोशकी समृद्धि करनेमें कुबेरके समान और धनको छिपानेमें वरुणके समान थे॥ ५९॥

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