॥ श्रीहरिः ॥
धर्मराडिव शिक्षायामाश्चर्ये हिमवानिव।
कुबेर इव कोशाढ्यो गुप्तार्थो वरुणो यथा॥ ५९
dharmarāḍiva śikṣāyāmāścarye himavāniva|
kubera iva kośāḍhyo guptārtho varuṇo yathā|| 59
अर्थ
महाराज पृथु दुष्टोंके दमन करनेमें यमराजके समान, आश्चर्यपूर्ण वस्तुओंके संग्रहमें हिमालयके समान, कोशकी समृद्धि करनेमें कुबेरके समान और धनको छिपानेमें वरुणके समान थे॥ ५९॥
धर्मराडिव शिक्षायामाश्चर्ये हिमवानिव।
कुबेर इव कोशाढ्यो गुप्तार्थो वरुणो यथा॥ ५९
महाराज पृथु दुष्टोंके दमन करनेमें यमराजके समान, आश्चर्यपूर्ण वस्तुओंके संग्रहमें हिमालयके समान, कोशकी समृद्धि करनेमें कुबेरके समान और धनको छिपानेमें वरुणके समान थे॥ ५९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.22.59 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 519) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/22/59/