श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.23.13

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

एवं स वीरप्रवरः संयोज्यात्मानमात्मनि।

ब्रह्मभूतो दृढं काले तत्याज स्वं कलेवरम्॥ १३

evaṃ sa vīrapravaraḥ saṃyojyātmānamātmani|

brahmabhūto dṛḍhaṃ kāle tatyāja svaṃ kalevaram|| 13

अर्थ

फिर जब अन्तकाल उपस्थित हुआ तो वीरवर पृथुने अपने चित्तको दृढ़तापूर्वक परमात्मामें स्थिर कर ब्रह्मभावमें स्थित हो अपना शरीर त्याग दिया॥ १३॥

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