श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.24.51

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

श्यामश्रोण्यधिरोचिष्णुदुकूलस्वर्णमेखलम्।✎ 1940

समचार्वङ्‌घ्रिजङ्घोरुनिम्नजानुसुदर्शनम् ॥ ५१

śyāmaśroṇyadhirociṣṇudukūlasvarṇamekhalam|

samacārvaṅghrijaṅghorunimnajānusudarśanam || 51

अर्थ

श्यामवर्ण कटिभागमें पीताम्बर और सुवर्णकी मेखला शोभायमान है। समान और सुन्दर चरण, पिंडली, जाँघ और घुटनोंके कारण आपका दिव्य विग्रह बड़ा ही सुघड़ जान पड़ता है॥ ५१॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1940 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): रोचिष्णुर्दुकूल → रोचिष्णुदुकूल

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