श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.24.70

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

तमेवात्मानमात्मस्थं सर्वभूतेष्ववस्थितम्।

पूजयध्वं गृणन्तश्‍च ध्यायन्तश्चासकृद्धरिम्॥ ७०

tamevātmānamātmasthaṃ sarvabhūteṣvavasthitam|

pūjayadhvaṃ gṛṇantaśca dhyāyantaścāsakṛddharim|| 70

अर्थ

तुमलोग अपने अन्तःकरणमें स्थित उन सर्वभूतान्तर्यामी परमात्मा श्रीहरिका ही बार-बार स्तवन और चिन्तन करते हुए पूजन करो॥ ७०॥✎ 415 1335

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #415 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् में → भगवान्‌में
  • #1335 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): करेेंगे॥ → करेंगे॥

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