तुमलोग अपने अन्तःकरणमें स्थित उन सर्वभूतान्तर्यामी परमात्मा श्रीहरिका ही बार-बार स्तवन और चिन्तन करते हुए पूजन करो॥ ७०॥✎ 4151335
तमेवात्मानमात्मस्थं सर्वभूतेष्ववस्थितम्।
पूजयध्वं गृणन्तश्च ध्यायन्तश्चासकृद्धरिम्॥ ७०
तुमलोग अपने अन्तःकरणमें स्थित उन सर्वभूतान्तर्यामी परमात्मा श्रीहरिका ही बार-बार स्तवन और चिन्तन करते हुए पूजन करो॥ ७०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.24.70 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 532) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/24/70/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#415 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् में → भगवान्में
#1335 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): करेेंगे॥ → करेंगे॥