श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.24.72

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

इदमाह पुरास्माकं भगवान् विश्‍वसृक्पतिः।

भृग्वादीनामात्मजानां सिसृक्षुः संसिसृक्षताम्॥ ७२

idamāha purāsmākaṃ bhagavān viśvasṛkpatiḥ|

bhṛgvādīnāmātmajānāṃ sisṛkṣuḥ saṃsisṛkṣatām|| 72

अर्थ

यह स्तोत्र पूर्वकालमें जगद्विस्तारके इच्छुक प्रजापतियोंके पति भगवान् ब्रह्माजीने प्रजा उत्पन्‍न करनेकी इच्छावाले हम भृगु आदि अपने पुत्रोंको सुनाया था॥ ७२॥✎ 415 1335

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #415 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् में → भगवान्‌में
  • #1335 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): करेेंगे॥ → करेंगे॥

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