श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.25.13

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

स एकदा हिमवतो दक्षिणेष्वथ सानुषु।

ददर्श नवभिर्द्वार्भिः१ पुरं लक्षितलक्षणाम्॥ १३

sa ekadā himavato dakṣiṇeṣvatha sānuṣu|

dadarśa navabhirdvārbhiḥ puraṃ lakṣitalakṣaṇām|| 13

अर्थ

एक दिन उसने हिमालयके दक्षिण तटवर्ती शिखरोंपर कर्मभूमि भारतखण्डमें एक नौ द्वारोंका नगर देखा। वह सब प्रकारके सुलक्षणोंसे सम्पन्‍न था॥ १३॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—र्द्वारैः।

    (मुद्रित पृष्ठ 534)

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