श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.25.12

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

न साधु मेने ताः सर्वा भूतले यावतीः पुरः।

कामान् कामयमानोऽसौ तस्य तस्योपपत्तये॥ १२

na sādhu mene tāḥ sarvā bhūtale yāvatīḥ puraḥ|

kāmān kāmayamāno'sau tasya tasyopapattaye|| 12

अर्थ

उसे तरह-तरहके भोगोंकी लालसा थी; उन्हें भोगनेके लिये उसने संसारमें जितने नगर देखे, उनमेंसे कोई भी उसे ठीक न जँचा॥ १२॥

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