प्रभो! इस नौ द्वारोंवाली पुरीमें मेरे प्रस्तुत किये हुए इच्छित भोगोंको भोगते हुए आप सैकड़ों वर्षोंतक निवास कीजिये॥ ३७॥✎ 13361337
इमां त्वमधितिष्ठस्व पुरीं नवमुखीं विभो।
मयोपनीतान् गृह्णानः कामभोगान् शतं समाः॥ ३७
प्रभो! इस नौ द्वारोंवाली पुरीमें मेरे प्रस्तुत किये हुए इच्छित भोगोंको भोगते हुए आप सैकड़ों वर्षोंतक निवास कीजिये॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.25.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 537) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/25/37/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
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