वह दौड़ती तो आप भी दौड़ने लगता, खड़ी होती तो आप भी खड़ा हो जाता, सोती तो आप भी उसीके साथ सो जाता और बैठती तो आप भी बैठ जाता॥ ५९॥
क्वचिद्धावति धावन्त्यां तिष्ठन्त्यामनु तिष्ठति।
अनु शेते शयानायामन्वास्ते क्वचिदासतीम्॥ ५९
वह दौड़ती तो आप भी दौड़ने लगता, खड़ी होती तो आप भी खड़ा हो जाता, सोती तो आप भी उसीके साथ सो जाता और बैठती तो आप भी बैठ जाता॥ ५९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.25.59 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 539) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/25/59/