श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.26.7

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

य एवं कर्म नियतं विद्वान् कुर्वीत मानवः।

कर्मणा तेन राजेन्द्र ज्ञानेन न स लिप्यते॥ ७

ya evaṃ karma niyataṃ vidvān kurvīta mānavaḥ|

karmaṇā tena rājendra jñānena na sa lipyate|| 7

अर्थ

राजन्! जो विद्वान् इस प्रकार शास्त्रनियत कर्मोंका आचरण करता है, वह उस कर्मानुष्ठानसे प्राप्त हुए ज्ञानके कारणभूत कर्मोंसे लिप्त नहीं होता॥ ७॥✎ 418

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #418 शब्दोंके बीचका स्थान: (बंब),दो → (बंब), दो

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