श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.27.16

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

स सप्तभिः शतैरेको विंशत्या च शतं समाः।

पुरंजनपुराध्यक्षो गन्धर्वैर्युयुधे बली॥ १६

sa saptabhiḥ śataireko viṃśatyā ca śataṃ samāḥ|

puraṃjanapurādhyakṣo gandharvairyuyudhe balī|| 16

अर्थ

यह पुरंजनपुरीकी चौकसी करनेवाला महाबलवान् सर्प सौ वर्षतक अकेला ही उन सात सौ बीस गन्धर्वगन्धर्वियोंसे युद्ध करता रहा॥ १६॥

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