श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.27.21

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

कदाचिदटमाना सा ब्रह्मलोकान्महीं गतम्।

वव्रे बृहद्व्रतं मां तु जानती काममोहिता॥ २१

kadācidaṭamānā sā brahmalokānmahīṃ gatam|

vavre bṛhadvrataṃ māṃ tu jānatī kāmamohitā|| 21

अर्थ

एक दिन मैं ब्रह्मलोकसे पृथ्वीपर आया, तो वह घूमती-घूमती मुझे भी मिल गयी। तब मुझे नैष्ठिक ब्रह्मचारी जानकर भी कामातुरा होनेके कारण उसने वरना चाहा॥ २१॥

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