॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.27.6
तस्यामजनयत्पुत्रान् पुरंजन्यां पुरंजनः।
शतान्येकादश विराडायुषोऽर्धमथात्यगात्॥ ६
tasyāmajanayatputrān puraṃjanyāṃ puraṃjanaḥ|
śatānyekādaśa virāḍāyuṣo'rdhamathātyagāt|| 6
अर्थ
प्रजापते! उस पुरंजनीसे राजा पुरंजनके ग्यारह सौ पुत्र और एक सौ दस कन्याएँ हुईं, जो सभी माता-पिताका सुयश बढ़ानेवाली और सुशीलता, उदारता आदि गुणोंसे सम्पन्न थीं। ये पौरंजनी नामसे विख्यात हुईं। इतनेमें ही उस सम्राट्की लंबी आयुका आधा भाग निकल गया॥ ६-७॥