उस समय—चन्द्रिका जिस प्रकार चन्द्रदेवका अनुसरण करती है—उसी प्रकार मत्तलोचना वैदर्भीने अपने घर, पुत्र और समस्त भोगोंको तिलांजलि दे पाण्ड्यनरेशका अनुगमन किया॥ ३४॥
हित्वा गृहान् सुतान् भोगान् वैदर्भी मदिरेक्षणा।
अन्वधावत पाण्ड्येशं ज्योत्स्नेव रजनीकरम्॥ ३४
उस समय—चन्द्रिका जिस प्रकार चन्द्रदेवका अनुसरण करती है—उसी प्रकार मत्तलोचना वैदर्भीने अपने घर, पुत्र और समस्त भोगोंको तिलांजलि दे पाण्ड्यनरेशका अनुगमन किया॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.28.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 549) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/28/34/