वहाँ चन्द्रवसा, ताम्रपर्णी और वटोदका नामकी तीन नदियाँ थीं। उनके पवित्र जलमें स्नान करके वे प्रतिदिन अपने शरीर और अन्तःकरणको निर्मल करते थे॥ ३५॥
तत्र चन्द्रवसा नाम ताम्रपर्णी वटोदका।
तत्पुण्यसलिलैर्नित्यमुभयत्रात्मनो मृजन्॥ ३५
वहाँ चन्द्रवसा, ताम्रपर्णी और वटोदका नामकी तीन नदियाँ थीं। उनके पवित्र जलमें स्नान करके वे प्रतिदिन अपने शरीर और अन्तःकरणको निर्मल करते थे॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.28.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 549) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/28/35/