पुरीके इस प्रकार पीड़ित किये जानेपर उसके स्वामित्वका अभिमान रखनेवाले तथा ममताग्रस्त, बहुकुटुम्बी राजा पुरंजनको भी नाना प्रकारके क्लेश सताने लगे॥ ५॥
तस्यां प्रपीड्यमानायामभिमानी पुरंजनः।
अवापोरुविधांस्तापान् कुटुम्बी ममताकुलः॥ ५
पुरीके इस प्रकार पीड़ित किये जानेपर उसके स्वामित्वका अभिमान रखनेवाले तथा ममताग्रस्त, बहुकुटुम्बी राजा पुरंजनको भी नाना प्रकारके क्लेश सताने लगे॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.28.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 546) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/28/5/