कालकन्याके आलिंगन करनेसे उसकी सारी श्री नष्ट हो गयी तथा अत्यन्त विषयासक्त होनेके कारण वह बहुत दीन हो गया, उसकी विवेकशक्ति नष्ट हो गयी। गन्धर्व और यवनोंने बलात् उसका सारा ऐश्वर्य लूट लिया॥ ६॥
कन्योपगूढो नष्टश्रीः कृपणो विषयात्मकः।
नष्टप्रज्ञो हृतैश्वर्यो गन्धर्वयवनैर्बलात्॥ ६
कालकन्याके आलिंगन करनेसे उसकी सारी श्री नष्ट हो गयी तथा अत्यन्त विषयासक्त होनेके कारण वह बहुत दीन हो गया, उसकी विवेकशक्ति नष्ट हो गयी। गन्धर्व और यवनोंने बलात् उसका सारा ऐश्वर्य लूट लिया॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.28.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 546) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/28/6/