॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.3.24
तत्ते२ निरीक्ष्यो न पितापि देहकृद् ✎ 1839
दक्षो मम द्विट् तदनुव्रताश्च ये।
यो विश्वसृग्यज्ञगतं वरोरु मा-
मनागसं दुर्वचसाकरोत्तिरः॥ २४
tatte nirīkṣyo na pitāpi dehakṛd
dakṣo mama dviṭ tadanuvratāśca ye|
yo viśvasṛgyajñagataṃ varoru mā-
manāgasaṃ durvacasākarottiraḥ|| 24
अर्थ
इसीलिये प्रिये! जिसने प्रजापतियोंके यज्ञमें, मेरेद्वारा कोई अपराध न होनेपर भी, मेरा कटुवाक्योंसे तिरस्कार किया था, वह दक्ष यद्यपि तुम्हारे शरीरको उत्पन्न करनेवाला पिता है, तो भी मेरा शत्रु होनेके कारण तुम्हें उसे अथवा उसके अनुयायियोंको देखनेका विचार भी नहीं करना चाहिये॥ २४॥
टिप्पणियाँ
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प्रा० पा०—त्वया।