हम तो भगवद्भक्तोंके क्षणभरके संगके सामने स्वर्ग और मोक्षको भी कुछ नहीं समझते; फिर मानवी भोगोंकी तो बात ही क्या है॥ ३४॥✎ 4231348
तुलयाम लवेनापि न स्वर्गं नापुनर्भवम्।
भगवत्संगिसंगस्य मर्त्यानां किमुताशिषः॥ ३४
हम तो भगवद्भक्तोंके क्षणभरके संगके सामने स्वर्ग और मोक्षको भी कुछ नहीं समझते; फिर मानवी भोगोंकी तो बात ही क्या है॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.30.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 568) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/30/34/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)