श्रीभगवान्ने कहा—राजपुत्रो! तुम्हारा कल्याण हो। तुम सबमें परस्पर बड़ा प्रेम है और स्नेहवश तुम एक ही धर्मका पालन कर रहे हो। तुम्हारे इस आदर्श सौहार्दसे मैं बड़ा प्रसन्न हूँ। मुझसे वर माँगो॥ ८॥✎ 422
वरं वृणीध्वं भद्रं वो यूयं मे नृपनन्दनाः।
सौहार्देनापृथग्धर्मास्तुष्टोऽहं सौहृदेन वः॥ ८
श्रीभगवान्ने कहा—राजपुत्रो! तुम्हारा कल्याण हो। तुम सबमें परस्पर बड़ा प्रेम है और स्नेहवश तुम एक ही धर्मका पालन कर रहे हो। तुम्हारे इस आदर्श सौहार्दसे मैं बड़ा प्रसन्न हूँ। मुझसे वर माँगो॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.30.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 565) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/30/8/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#422 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने