श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.30.9

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

योऽनुस्मरति सन्ध्यायां युष्माननुदिनं नरः।

तस्य भ्रातृष्वात्मसाम्यं तथा भूतेषु सौहृदम्॥ ९

yo'nusmarati sandhyāyāṃ yuṣmānanudinaṃ naraḥ|

tasya bhrātṛṣvātmasāmyaṃ tathā bhūteṣu sauhṛdam|| 9

अर्थ

जो पुरुष सायंकालके समय प्रतिदिन तुम्हारा स्मरण करेगा, उसका अपने भाइयोंमें अपने ही समान प्रेम होगा तथा समस्त जीवोंके प्रति मित्रताका भाव हो जायगा॥ ९॥✎ 422

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #422 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने

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