राजा प्रियव्रतने श्रीनारदजीसे आत्मज्ञानका उपदेश पाकर भी राज्यभोग किया था तथा अन्तमें इस सम्पूर्ण पृथ्वीको अपने पुत्रोंमें बाँटकर वे भगवान्के परमधामको प्राप्त हुए थे॥ २७॥
यो नारदादात्मविद्यामधिगम्य पुनर्महीम्।
भुक्त्वा विभज्य पुत्रेभ्य ऐश्वरं समगात्पदम्॥ २७
राजा प्रियव्रतने श्रीनारदजीसे आत्मज्ञानका उपदेश पाकर भी राज्यभोग किया था तथा अन्तमें इस सम्पूर्ण पृथ्वीको अपने पुत्रोंमें बाँटकर वे भगवान्के परमधामको प्राप्त हुए थे॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.31.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 573) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/31/27/