श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.31.31

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 31 · अथैकत्रिंशोऽध्यायः

एतद्यः शृणुयाद्राजन् राज्ञां हर्यर्पितात्मनाम्।

आयुर्धनं यशः स्वस्ति गतिमैश्‍वर्यमाप्नुयात्॥ ३१

etadyaḥ śṛṇuyādrājan rājñāṃ haryarpitātmanām|

āyurdhanaṃ yaśaḥ svasti gatimaiśvaryamāpnuyāt|| 31

अर्थ

राजन्! जो पुरुष भगवान्‌के शरणागत परमभागवत राजाओंका यह पवित्र चरित्र सुनेगा, उसे दीर्घ आयु, धन, सुयश, क्षेम, सद्गति और ऐश्‍वर्यकी प्राप्ति होगी॥ ३१॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे वैयासिक्यामष्टादशसाहस्र्यां पारमहंस्यां
संहितायां चतुर्थस्कन्धे प्रचेतसोपाख्यानं
नामैकत्रिंशोऽध्यायः
॥ ३१॥

॥ इति चतुर्थः स्कन्धः समाप्तः॥

॥ हरिः ॐ तत्सत्॥
 

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