॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.31.9
नारद उवाच
तज्जन्म तानि कर्माणि तदायुस्तन्मनो वचः।
नृणां येनेह१ विश्वात्मा सेव्यते हरिरीश्वरः॥ ९
tajjanma tāni karmāṇi tadāyustanmano vacaḥ|
nṛṇāṃ yeneha viśvātmā sevyate harirīśvaraḥ|| 9
अर्थ
श्रीनारदजीने कहा—राजाओ! इस लोकमें मनुष्यका वही जन्म, वही कर्म, वही आयु, वही मन और वही वाणी सफल है, जिसके द्वारा सर्वात्मा सर्वेश्वर श्रीहरिका सेवन किया जाता है॥ ९॥✎ 427
टिप्पणियाँ
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प्रा० पा०—येन हि।