श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—भगवन्मय श्रीनारदजीका चित्त सर्वदा भगवान् श्रीकृष्णमें ही लगा रहता है। वे प्रचेताओंके इस प्रकार पूछनेपर उनसे कहने लगे॥ ८॥
इति प्रचेतसां पृष्टो भगवान्नारदो मुनिः।
भगवत्युत्तमश्लोक आविष्टात्माब्रवीन्नृपान्॥ ८
श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—भगवन्मय श्रीनारदजीका चित्त सर्वदा भगवान् श्रीकृष्णमें ही लगा रहता है। वे प्रचेताओंके इस प्रकार पूछनेपर उनसे कहने लगे॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.31.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 571) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/31/8/