॥ श्रीहरिः ॥
अबाधन्त मुनीनन्य एके पत्नीरतर्जयन्।
अपरे जगृहुर्देवान् प्रत्यासन्नान् पलायितान्॥ १६
abādhanta munīnanya eke patnīratarjayan|
apare jagṛhurdevān pratyāsannān palāyitān|| 16
अर्थ
कोई-कोई मुनियोंको तंग करने लगे, कोई स्त्रियोंको डराने-धमकाने लगे और किन्हींने अपने पास होकर भागते हुए देवताओंको पकड़ लिया॥ १६॥
अबाधन्त मुनीनन्य एके पत्नीरतर्जयन्।
अपरे जगृहुर्देवान् प्रत्यासन्नान् पलायितान्॥ १६
कोई-कोई मुनियोंको तंग करने लगे, कोई स्त्रियोंको डराने-धमकाने लगे और किन्हींने अपने पास होकर भागते हुए देवताओंको पकड़ लिया॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.5.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 426) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/5/16/