श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.5.25

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

साधुवादस्तदा तेषां कर्म तत्तस्य शंसताम्।

भूतप्रेतपिशाचानामन्येषां तद्विपर्ययः॥ २५

sādhuvādastadā teṣāṃ karma tattasya śaṃsatām|

bhūtapretapiśācānāmanyeṣāṃ tadviparyayaḥ|| 25

अर्थ

यह देखकर भूत, प्रेत और पिशाचादि तो उनके इस कर्मकी प्रशंसा करते हुए ‘वाह-वाह’ करने लगे और दक्षके दलवालोंमें हाहाकार मच गया॥ २५॥

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