श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.5.24

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

दृष्ट्वा संज्ञपनं योगं पशूनां स पतिर्मखे।

यजमानपशोः कस्य कायात्तेनाहरच्छिरः॥ २४

dṛṣṭvā saṃjñapanaṃ yogaṃ paśūnāṃ sa patirmakhe|

yajamānapaśoḥ kasya kāyāttenāharacchiraḥ|| 24

अर्थ

तब उन्होंने यज्ञमण्डपमें यज्ञपशुओंको जिस प्रकार मारा जाता था, उसे देखकर उसी प्रकार दक्षरूप उस यजमान पशुका सिर धड़से अलग कर दिया॥ २४॥

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