तब उन्होंने यज्ञमण्डपमें यज्ञपशुओंको जिस प्रकार मारा जाता था, उसे देखकर उसी प्रकार दक्षरूप उस यजमान पशुका सिर धड़से अलग कर दिया॥ २४॥
दृष्ट्वा संज्ञपनं योगं पशूनां स पतिर्मखे।
यजमानपशोः कस्य कायात्तेनाहरच्छिरः॥ २४
तब उन्होंने यज्ञमण्डपमें यज्ञपशुओंको जिस प्रकार मारा जाता था, उसे देखकर उसी प्रकार दक्षरूप उस यजमान पशुका सिर धड़से अलग कर दिया॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.5.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 427) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/5/24/