वहाँ उन्होंने अलका नामकी एक सुरम्य पुरी और सौगन्धिक वन देखा, जिसमें सर्वत्र सुगन्ध फैलानेवाले सौगन्धिक नामके कमल खिले हुए थे॥ २३॥✎ 1976
ददृशुस्तत्र ते रम्यामलकां नाम वै पुरीम्।
वनं सौगन्धिकं चापि यत्र तन्नाम पङ्कजम्॥ २३
वहाँ उन्होंने अलका नामकी एक सुरम्य पुरी और सौगन्धिक वन देखा, जिसमें सर्वत्र सुगन्ध फैलानेवाले सौगन्धिक नामके कमल खिले हुए थे॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.6.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 430) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/6/23/
टिप्पणियाँ
३
प्रा० पा०—तस्य ते।
(मुद्रित पृष्ठ 430)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1024 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ददृशुस्तत्र् → ददृशुस्तत्र
#1976 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): उसमें → उनमें