श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.6.23

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

ददृशुस्तत्र३ ते रम्यामलकां नाम वै पुरीम्।✎ 1024

वनं सौगन्धिकं चापि यत्र तन्‍नाम पङ्कजम्॥ २३

dadṛśustatra te ramyāmalakāṃ nāma vai purīm|

vanaṃ saugandhikaṃ cāpi yatra tannāma paṅkajam|| 23

अर्थ

वहाँ उन्होंने अलका नामकी एक सुरम्य पुरी और सौगन्धिक वन देखा, जिसमें सर्वत्र सुगन्ध फैलानेवाले सौगन्धिक नामके कमल खिले हुए थे॥ २३॥✎ 1976

टिप्पणियाँ

  1. ३

    प्रा० पा०—तस्य ते।

    (मुद्रित पृष्ठ 430)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1024 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ददृशुस्तत्र् → ददृशुस्तत्र
  • #1976 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): उसमें → उनमें

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