śakteḥ śivasya ca paraṃ yattadbrahma nirantaram|| 42
अर्थ
श्रीब्रह्माजीने कहा—देव! मैं जानता हूँ, आप सम्पूर्ण जगत्के स्वामी हैं; क्योंकि विश्वकी योनि शक्ति (प्रकृति) और उसके बीज शिव (पुरुष)-से परे जो एकरस परब्रह्म है, वह आप ही हैं॥ ४२॥
जाने त्वामीशं विश्वस्य जगतो योनिबीजयोः।
शक्तेः शिवस्य च परं यत्तद्ब्रह्म निरन्तरम्॥ ४२
श्रीब्रह्माजीने कहा—देव! मैं जानता हूँ, आप सम्पूर्ण जगत्के स्वामी हैं; क्योंकि विश्वकी योनि शक्ति (प्रकृति) और उसके बीज शिव (पुरुष)-से परे जो एकरस परब्रह्म है, वह आप ही हैं॥ ४२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.6.42 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 432) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/6/42/