श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.7.24

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

अप्यर्वाग्वृत्तयो यस्य महि त्वात्मभुवादयः।

यथामति गृणन्ति स्म कृतानुग्रहविग्रहम्॥ २४

apyarvāgvṛttayo yasya mahi tvātmabhuvādayaḥ|

yathāmati gṛṇanti sma kṛtānugrahavigraham|| 24

अर्थ

यद्यपि भगवान्‌की महिमातक ब्रह्मा आदिकी मति भी नहीं पहुँच पाती, तो भी भक्तोंपर कृपा करनेके लिये दिव्यरूपमें प्रकट हुए श्रीहरिकी वे अपनी-अपनी बुद्धिके अनुसार स्तुति करने लगे॥ २४॥✎ 363

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #363 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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