श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.7.43

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

गन्धर्वा ऊचुः

अंशांशास्ते देव मरीच्यादय एते

ब्रह्मेन्द्राद्या देवगणा रुद्रपुरोगाः।

क्रीडाभाण्डं विश्‍वमिदं यस्य विभूमन्

तस्मै नित्यं नाथ नमस्ते करवाम॥ ४३

aṃśāṃśāste deva marīcyādaya ete

brahmendrādyā devagaṇā rudrapurogāḥ|

krīḍābhāṇḍaṃ viśvamidaṃ yasya vibhūman

tasmai nityaṃ nātha namaste karavāma|| 43

अर्थ

गन्धर्वोंने कहा—देव! मरीचि आदि ऋषि और ये ब्रह्मा, इन्द्र तथा रुद्रादि देवतागण आपके अंशके भी अंश हैं। महत्तम! यह सम्पूर्ण विश्‍व आपके खेलकी सामग्री है। नाथ! ऐसे आपको हम सर्वदा प्रणाम करते हैं॥ ४३॥

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